अपनी कुंडली के योगों से जानिए आपकी लव मैरिज होगी या अरेंज

शादी और प्यार इंसान के जीवन के दो सबसे खूबसूरत प्रसंग होते हैं और अगर प्रेम विवाह हो तो वह शादी और प्यार दोनों को और भी खूबसूरत बना देता है। खैर आपकी लव मैरिज होगी या फिर अरेंज यह तो आपकी कुंडली ही बता सकती हैं। जिस तरह आपकी कुंडली में करियर, जीवन आदि की रेखाएं होती हैं ठीक उसी प्रकार आपकी कुंडली के योगों से आपकी शादी के विषय में भी बहुत कुछ जान सकते है| तो आइए जानते हैं कैसे आपकी कुंडली को देख कर आप जीवन में होने वाले खूबसूरत बदलाव के बारे में जान सकते हैं।

अपनी कुंडली के योगों से जानिए आपकी लव मैरिज होगी या अरेंज

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अरेंज और लव मैरिज में अंतर

अरेंज मैरिज: अंरेंज मैरिज में दो परिवार आपस में मिलकर सारे फैसले लेते हैं।भारत में ज़्यादातर लोग अरेंज मैरेज को बेहतर मानते हैं क्योंकि इसमें एक समान हैसियत रखने वाले परिवारों के बीच रिश्ता होता है। इसलिए किसी तरह के सांस्कृतिक मतभेद की संभावना कम होती है। इससे वर और वधू को परिवार के साथ घुलने मिलने में कठिनाई नहीं होती!

लव मैरिज: इस तरह के विवाह में परिवार की बजाए लड़के और लड़की की मंज़ूरी को तवज्जों दी जाती है।अगर किसी लड़के या लड़की को आपस में प्रेम हो जाए तो वे विवाह करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। हालांकि लव मैरिज 40-50 साल पहले ज़्यादा चलन में नहीं थी लेकिन आजकल इसका महत्व बढ़ गया है। शादी से पहले हर युवा चाहता है कि वह अपने पार्टनर को अच्छी तरह जानता हो। लेकिन आपकी लव मैरिज होगी या नहीं यह ग्रहों की स्थिति से तय होता है। इसके लिए मंगल, शुक्र, राहु, चंद्रमा और बुध ग्रह ज़िम्मेदार होते हैं।

 

कुंडली में किन योगों से पता चलता है आपका प्रेम विवाह होगा|

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के चार भावों से पता चलता है कि आपका प्रेम विवाह होगा या नहीं? पांचवे, सातवें,आठवें और ग्याहरवें भाव से इसका पता लगाया जाता है। इसके लिए वृश्चिक, मिथुन और मीन चिह्नों पर ध्यान दिया जाता है।प्रेम विवाह के लिए मंगल, शुक्र, राहु और बुध ग्रह ज़िम्मेदार होते हैं।अगर बुध या शुक्र राहु के साथ हो तो प्रेम विवाह की संभावना बढ़ जाती है। शुक्र अगर दूसरे, नौवें या ग्यारहवें भाग पर बेठा हो तो भी प्रेम विवाह संभव होता है।

 

क्या आपकी कुंडली में है प्रेम योग?

कुंडली का सातवां भाव प्रेम संबंधों को दर्शाता है। यह बताता है कि आपका वैवाहिक जीवन कैसा होगा?इसलिए विवाह से पूर्व जब राशि का मिलान किया जाता है तो इस भाव की विशेष तौर पर जांच की जाती है।

पंचम और सप्तम भाव प्रेम और वैवाहिक संबंधों के लिए विशेष महत्व रखता है।शुक्र अगर सप्तमेश से संबंधित होकर पांचवे स्थान पर बैठा हो तो यह प्रेम विवाह के लिए शुभ संकेत है। हालांकि शनि और केतु विघातक ग्रह हैं लेकिन सातवे भाव में में इनका योग प्रेम विवाह के अनुकूल है।

अगर आप भी किसी से प्रेम करते हैं और जानना चाहते हैं कि आपकी उससे शादी होगी या नहीं तो हमारे ज्योतिषी से संपर्क करें।, प्रेम विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करें।

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