रक्षाबंधन 2020 - रक्षाबंधन पर्व, शुभ मुहूर्त और कथा

रक्षाबंधन हिन्दुओं का एक प्रमुख एवं प्रसिद्ध त्यौहार है | यह भाई तथा बहन के बीच स्नेह का त्यौहार है | रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की दाहिने हाथ की कलाई पर एक धागा या सूत्र बांधती है | इस धागे को रक्षा सूत्र या राखी भी कहा जाता है | भाई इस अवसर पर बहन को उसकी सुरक्षा का वचन देता है | बहन भी इस अवसर पर भाई की लम्बी उम्र की कामना करती है | बहन भाई को तिलक लगाकर मिठाई खिलाती है तथा भाई भी बहन को उपहार देता है | यह त्यौहार उत्तर भारत में अधिकतर मनाया जाता है | इस दिन ब्राहमण लोग भी अपने जनेऊ को बदलते है | इस त्यौहार को श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | इस वर्ष यह त्यौहार 3 अगस्त 2020 को मनाया जायेगा|

रक्षाबंधन  2020 - रक्षाबंधन पर्व, शुभ मुहूर्त और कथा

शुभ मुहूर्त:

अनुष्ठान का समय -09.28 से रात्रि 09.14 बजे तक

अपरान्ह मुहूर्त –दोपहर 01.46 से शाम 04.26 बजे तक

प्रदोष कल मुहूर्त –शाम 07.06 से रात्रि 09.14 बजे तक

रक्षाबंधन को मनाने की अनेक पोराणिक कथायें है | किन्तु महाभारत में वर्णित कथा अत्यंत लोकप्रिय है |

इस कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की अगुली शिशुपाल का वध करते समय सुदर्शन चक्र से घायल हो गयी थी | तब द्रौपती ने भगवान श्रीकृष्ण की घायल अंगुली पर अपनी साडी में से एक चिंदी फाड़ कर बंधी थी | इस पर भगवान श्रीकृष्ण  ने द्रौपती को उसकी रक्षा का वचन दिया था |

एक अन्य पोराणिक कथा के अनुसार देवताओ एवं असुरों के मध्य 12 वर्ष तक युध्य चला था जिसमे असुरो ने विजय प्राप्त की थी | असुरों ने देवराज इंद्र के सिंहासन सहित तीनो लोको को जीत लिया था | इस पर देवराज इंद्र ने अपने गुरु ब्रहस्पति से सलाह मांगी थी | गुरु ब्रहस्पति ने श्रावन मास की पूर्णिमा को रक्षा विधान संस्कार शुरू किया | इस के दौरान मंत्रौचार से रक्षा पोटली को शक्तिशाली किया | पूजा के पश्चात् इस रक्षा पोटली को देवराज इंद्र की पत्नी शची जिन्हें इन्द्राणी भी कहते है ने देवराज इंद्र की दाहिने हाथ की कलाई पर बांधा था | इसकी ताकत के दम पर ही  देवतों ने असुरों पर  विजय प्राप्त की थी | 

हमारे देश की आजादी के दौरान भी सन 1905 में नोबल पुरस्कार विजेता श्री रविंद्रनाथ टैगोर ने अंग्रेजों की हिन्दू एवं मुस्लिमों को बाँटने की चाल को नाकाम करने के लिए बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा एक दुसरे समुदाय के पुरुषों  को राखी बांध कर भाई बनाने के  अभियान को चलाया था |

इस प्रकार रक्षाबंधन का त्यौहार प्रचलन में आया था | इस त्यौहार को मनाने के पीछे जो भावना है उसके कारण यह त्यौहार केवल हिन्दुओं तक सीमित नहीं रहा है | इसे अन्य समुदायों के लोग भी मनाने लगे है | इस प्रकार से यह त्यौहार हमारे देश को एक सूत्र में बांधने में भी सफल रहा है |

इस प्रकार यह त्यौहार बहन  तथा भाई के पवित्र स्नेह बंधन का प्रतीक  बन गया है |

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