शनि जयंती - शनिदेव को प्रसन्न करने के चमत्कारी ज्योतिषीय उपाय

शनि देव के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनि जयंती के दिन उनकी पूजा करनी चाहिए। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राशि अनुसार शनि देव के मंत्रों का जप करने से भी शनि के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करना चाहिए और चमत्कारी ज्योतिषीय उपाय ।

शनि जयंती - शनिदेव को प्रसन्न करने के चमत्कारी ज्योतिषीय उपाय

इस बार न्याय के देवता कहे जाने वाले शनिदेव की जयंती 22 मई को मनायी जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार इस बार अमावस्या तिथि 21 मई को शाम 9 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 22 मई को रात 11 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। इसलिए शनि अमावस्या 22 मई को मनायी जाएगी। इस दिन शनि दोषों से मुक्ति के लिए शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जो जातक शनि की महादशा, अंतरदशा, साढ़ेसाती, ढैया, के प्रभाव में हैं, उन्हें शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय करना चाहिए।

शनि देव के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनि जयंती के दिन उनकी पूजा करनी चाहिए। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राशि अनुसार शनि देव के मंत्रों का जप करने से भी शनि के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करना चाहिए और चमत्कारी ज्योतिषीय उपाय

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शनिदेव की पूजा करने का महत्व

जिन लोगों को हमेशा कष्ट, निर्धनता, बीमारी व अन्य तरह की परेशानियां होती हैं, उन्हें शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए। शनिदेव की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। हिंदू धर्म में शनि देवता भी हैं और नवग्रहों में प्रमुख ग्रह भी जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में बहुत अधिक महत्व मिला है।  

शुभ मुहूर्त

शनि जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है।

शनि जयंती -22 मई २०२०,

अमावस्या तिथि आरंभ – रात के 09 बजकर 35 मिनट पर (21 मई 2020)

अमावस्या तिथि समाप्त – रात के 11 बजकर 07 मिनट पर (22 मई 2020

 

शनिदेव को प्रसन्न करने के चमत्कारी ज्योतिषीय उपाय

शनिदेव को मनाने के लिए आप कुछ उपाय कर सकते हैं। जिससे आपके अच्छे दिन लौट आएंगे:

  1. शनिदेव की कृपा पाने के लिए अपने माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करें। यदि आप अपने माता-पिता से दूर रहते हैं तो उन्हें फोन से या फिर मन ही मन प्रतिदिन प्रणाम करें।
  2. यदि आप पर शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है आप खुद को तमाम परेशानियों से घिरा पा रहे हैं तो शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांधे तथा ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
  3. शनि से जुड़े दोष दूर करने या फिर उनकी कृपा पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।

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  1. भगवान शिव की तरह उनके अंशावतार बजरंग बली की साधना से भी शनि से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाती हैं। कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।
  2. शनिदेव के प्रकोप को शांत करने के लिए यह मंत्र काफी प्रभावी है।

सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिव प्रिय:।

मंदाचाराह प्रसन्नात्मा पीड़ां दहतु में शनि:।।

  1. शमी का वृक्ष घर में लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। इससे न सिर्फ आपके घर का वास्तुदोष दूर होगा बल्कि शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी।
  2. शनिवार के दिन शनि महाराज को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं और काले रंग की बाती और तिल के तेल से दीप जलाएं। साथ ही शनिवार के दिन महाराज दशरथ का लिखा शनि स्तोत्र पढ़ें।

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